भगवानपुरा क्षेत्र में कजली तीज का त्योहार मनाया गया

भीलवाड़ा समाचार (लुहारिया) जगदीश चन्द्र मंगलवार।
कजली तीज के दिन विवाहित महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत रखती है यह कजरी तीज या सातुड़ी तीज के नाम से भी जानी जाती है भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को कजरी तीज त्यौहार मनाया जाता है । हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष यह त्यौहार 31 अगस्त सोमवार को मनाया गया । कजरी तीज के दिन विवाहित महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत रखा । इस व्रत को कर कजली तीज या सातुड़ी तीज के नाम से भी जाना जाता है मान्यता है कि इस दिन उपवास रखने से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और परिवार में सुख समृद्धि बनी रहती है । सुहागिन महिलाऐ  इस त्यौहार के दिन भगवान शिव और माता पार्वती  की व नीमड़ी माता की पूजन करती है नीमड़ी माता की विधिवत पूजा कर उन्हें कैला एवं सत्तू नींबू ककड़ी रोली अक्षत इत्यादि अर्पित करती है महिलाएं घी या मेवे से बने प्रसाद का भोग लगाकर शाम को चंद्र देव को अर्घ्य देने के बाद उपवास खोलती है । *कजली तीज का महत्व* कजली तीज के दिन सुहागिन महिलाएं पति के दीर्घायु होने और उनके सुखमय जीवन के लिए व्रत कर रखती  है । कुंवारी कन्याएं भी यह व्रत मनचाहा वर पाने के लिए रखती है । कहा जाता है कि अगर कुंवारी कन्याऐ कजली तीज के व्रत को रखती है और शाम के समय कजरी तीज की कथा का पाठ करती है तो भगवान भोलेनाथ उनकी मनोकामना पूर्ण कर मनचाहा वर प्राप्त करने की कामना पूरी होने का आशीर्वाद प्रदान करते हैं ।